Ex :-4 उत्सर्जन
* उत्सर्जन :- व्यक्ति या जीव के शरीर के अंदर से हानिकारक या अवशिष्ट पदार्थो को बाहर निकलने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते है।
* उत्सर्जन तंत्र :- उत्सर्जन की प्रक्रिया में भाग लेने वाले अंगों को शम्मलित रूप से उत्सर्जन तंत्र कहते है।
* उत्सर्जी पदार्थ :-H2O, Co2, NH3, यूरिया,यूरोफ्रोम यूरिकएसिड।
➤मानव शरीर के अंदर सबसे अधिक विषैला पदार्थ अमोनिया है।
* उत्सर्जी अंग :- त्वचा, फेफड़ा, वृक्क, आँत, अग्न्याशय, यकृत।
* मानव शरीर के अंदर सबसे प्रमुख उत्सर्जी वृक्क है।
वृक्क
:- वृक्क मानव शरीर के अंदर सबसे प्रमुख उत्सर्जी अंग है। यह एक जोड़ी पाया जाता है और उदर गुहा के दोनों ओर स्थित होता है। इसका आकार सेम के बीज के समान होता है इसे कटे जाने पर स्पष्टत दो भागो में बट जाता है। इसके बाहरी भाग कॉटेक्स तथा अंदर वाले भाग को मेडुला कहा जाता है। वृक्क के आगे एक प्याली नुमा संरचना होती है, जिसे वोमैन सैम्पुट कहते है। इसकी कार्ययात्मक इकाई नेफ्रॉन होती है। एक नेफ्रॉन में 10 लाख वृक्क नलिकाएँ पाई जाती है इसका वजन 140 gm तथा रंग भूरा होता है।
* वृक्क के कार्य :- वृक्क द्वारा मूत्र निर्माण या उत्सर्जन की क्रिया मुख्यत: तीन चरणों में पूरी होती है।
(i) ग्लोमेरूलर फिल्ट्रेशन
(ii) ट्यूबूलर पुनरवशोषण
(iii) ट्यूबूलर स्त्रवण
* मूत्र :- यह हल्का पीलेपन लिए हुए एक प्रकार का अम्लीय द्रव्य है इसका Ph मान 4.8 होता है इसका पीला रंग यूरोक्रोम के कारण होता है। यूरोक्रोम का निर्माण हीमोग्लोबिन विखंड से होता है। यह सामान्य जल से भारी होता है।
* मूत्र में अन्य पदार्थ :-
(i) जल :- 96%
(ii) यूरिया :- 2%
(iii) अन्य ठोस पदार्थ :- 2%
➤ मूत्र मार्ग में पथरी नामक बीमारी होती है जो पथरी कैल्सियम ऑक्जीलेट के बने होते है।
* डायलेसिस (अपोहन) :- जब व्यक्ति का मुख्य वृक्क किसी कारण बस नष्ट हो जाए तो जिस कृत्रिम प्रक्रम द्वारा व्यक्ति या जीव के शरीर के अंदर से हानिकारक व अवशिष्ट पदार्थ बहार निकला जाता है, तो उसे डायलेसिस कहते है।
* पेड़ - पौधा में उत्सर्जन :- पेड़ - पौधा में भी उत्सर्जन की क्रिया होती है लेकिन इसमें उत्सर्जन जंतुओं से भिन्न होती है l ये अपने उत्सर्जी पदार्थ को पुराने तना, पत्ती व छालों में सेचित कर देता है जिसके माध्यम से उत्सर्जी पदार्थ बाहर निकलता है।
➤ पेड़ - पौधा में उत्सर्जी पदार्थ :- टैनिक, रेजिन गोंद, दूध (लैक्टोज), लाह, रबर।
➤चिड़ के पौधा से ताड़पीन का तेल निकाला जाता है।
➤सिनकोना के छाल से कुनैन तैयार होता है जो मलेरिया निर्वाक दवा है।
➤साइक्स के मंड से खाने वाला साबूदाना तैयार होता है।

