Ex :-6 वैश्वीकरण
⇒वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण किया जाता है,ताकि सेवाओं ,प्रौद्योगिकी ,पूँजी और श्रम या मानवीय पूँजी का भी निर्बाध प्रवाह हो सके।
➤वैश्वीकरण के अंतर्गत पूँजी ,वस्तु
तथा प्रौधोगिकी का निर्बाध रूप से एक देश से दूसरे देश में प्रवाह होता है।
➤ब्रैंको मिलनोविक ने कहा है -वैश्वीकरण का अर्थ पूँजी ,वस्तु ,प्रौद्योगिकी
एवं लोगों का विचार का स्वतंत्र प्रवाह होता है।
*मॉल
:-मॉल ऐसे बाजार को कहते है ,जिसमें एक छत के नीचे उपभोग की सारी छोटी-बड़ी वस्तुएँ
उपलब्ध होती है उसे मॉल कहते है।
➥वैश्वीकरण,निजीकरण तथा उदारीकरण की नीतियों का परिणाम है।
*निजीकरण(Privatisation):-निजी
क्षेत्र द्वारा सार्वजानिक क्षेत्र के उधमों पर पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से
स्वामित्व प्राप्त करना तथा उनका प्रबंध करना है।
➤भारत सरकार ने 1991 से निजीकरण की निति अपनायी।
*उदारीकरण(Liberalisation):-उदारीकरण
का अर्थ सरकार द्वारा लगाए गए सभी अनावश्यक नियंत्रणो तथा प्रतिबंधों को हटाना है,जिससे
आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले।
*वैश्वीकरण
के अंग
⇒वैश्वीकरण
के पाँच मुख्य अंग है।
1. व्यवसाय
और व्यापार संबंधी अवरोधों की कमी
2. पूँजी का
निर्बाध प्रवाह
3. श्रम का
निर्बाध प्रवाह
4. प्रौद्योगिकी
का निर्बाध प्रवाह
5. पूँजी की
पूर्ण परिवर्तनशीलता
*वैश्विक
गाँव :-ऐसा आवासीय स्थान जँहा विभिन्न देशों ,विभिन्न विचारों और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के सभी
लोगों को रहने की व्यवस्था की जाती है ,उसे वैश्विक गाँव कहते है।
*बहुराष्ट्रीय
कंपनी :-वह कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण व स्वामित्व रखती
है ,बहुराष्ट्रीय
कंपनी कहलाता है।
जैसे:-सैमसंग ,नोकिया ,टाटा मोटर्स आदि
*बहुराष्ट्रीय
कंपनी की कार्य-प्रणाली
⇒बहुराष्ट्रीय
कंपनीयाँ उत्पादन लागत में कमी करने एवं अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उन देशों
में उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती है,जँहा उन्हें सस्ता श्रम ,सस्ता कच्चा माल एवं अन्य संसाधन मिलते है।
➤बहुराष्ट्रीय कंपनीयाँ वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन
विश्व-स्तर पर कर रही है।
➤ग्राहक देखभाल सेवा के लिए भारत स्थित कॉल सेंटरों का
उपयोग किया जाता है।
➤पारले समूह के 'थम्स अप' ब्रांड को कोका कोला ने खरीद लिया।
*निवेश:-मशीन
,उपकरणों ,भूमि
जैसी परिसंम्पत्तियों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते है।
*विदेशी
निवेश :-बहुराष्ट्रीय कंपनीयों द्वारा किये गए निवेश को विदेशी निवेश कहते है।
*वैश्वीकरण
एवं बाजारों का एकीकरण
⇒विदेशी
व्यापार विश्व के देशों के बाजारों को जोड़ने का कार्य करते है। पहले से ही विदेशी
व्यापार विभिन्न देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य साधन रहा है। जैसे-व्यापार करने
के लिए ही ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आयी। विदेशी व्यापार,उत्पादकों
को घरेलू बाजार से बाहर निकलकर दूसरे देश के बाजारों में पहुँचने एवं विदेशी
कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार विदेशी व्यापार दुनिया के देशों के
बाजारों को जोड़ने का कार्य करता है।
*वैश्वीकरण
को संभव बनाने वाले कारक
⇒वैश्वीकरण
की प्रक्रिया को बढ़ाने वाले दो मुख्य कारक है।
1. प्रौद्योगिकी
में प्रगति :-प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की
प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है।
➤सुचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने वैश्वीकरण की
प्रक्रिया को काफी तेज किया है।
2. विदेश-व्यापार
तथा विदेशी निवेश का उदारीकरण :-शुरू के वर्षों में भारत ने अपने यहाँ विदेशी
व्यापार और विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था ,यह निति घरेलु उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए थी ?
➤भारत में 1991 से उदारीकृत व्यापार निति प्रारंभ की गई।
*व्यापार
अवरोधक :-सरकार व्यापार अवरोधक का प्रयोग विदेशी व्यापार में वृद्धि या कटौती करने
एवं कौन सी वस्तु देश में कितनी मात्रा में आयात होनी चाहिए यह निर्णय करने के लिए
करती है।
➤व्यापार अवरोध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सरकार द्वारा
प्रेरित प्रतिबंध हैं।
*विश्व
व्यापार संगठन(W.T.O.):-यह एक
अंतर्राष्ट्रीय संगठन है,जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है
इस संगठन की स्थापना जनवरी 1995 में की गई थी।
➤विश्व व्यापार संगठन के 149 देश (2006) सदस्य है।
➤विश्व व्यापार संगठन में वर्तमान समय में 164 सदस्य
(यूरोपीय संघ सहित) एवं 23 पर्यवेक्षक सरकारें (जैसे ईरान, इराक, भूटान, लीबिया
आदि) हैं।
➤विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय जेनेवा में है।
➤विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की
सुविधा देता है।
*भारत में
वैश्वीकरण क्यों ?
⇒भारत
विश्व का बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के कारण दुनिया के सभी देशो की नजर भारत पर रहती
है। ऐसी स्थिति में देश में आधुनिक तकनिकी ज्ञान एवं पूंजी को आकर्षित करने के लिए
तथा विश्व बाजार में मानव पूंजी और उत्पादित वस्तु को भेजने में वैश्वीकरण का
महत्व बहुत बढ़ जाता है।
➥भारत में वैश्वीकरण के पक्ष में तर्क :-
1. प्रत्यक्ष
विदेशी निवेश का प्रोत्साहन
2. प्रतियोगी
शक्ति में वृद्धि
3. नई-प्रौद्योगिकी
के प्रयोग में सहायक
4. अच्छी
उपभोक्ता वस्तुओं की प्राप्ति
5. नये
बाजार तक पहुँच
6. उत्पादन
तथा उत्पादिता के स्तर को उन्नत करना
7. बैंकिंग
तथा वित्तीय क्षेत्र में सुधार
8. मानवीय
पूंजी की क्षमता का विकास
➨भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए० पी० जे० अब्दुल कलाम ने किसी
एक संदर्भ में यह कहा था "देश की प्रगति के लिए बिहार प्रगति अनिवार्य है।
"
*बिहार
में वैश्वीकरण का प्रभाव
➠बिहार में वैश्वीकरण का सकारात्मक प्रभाव
1. कृषि
उत्पादन में वृद्धि
2. निर्यातों
में वृद्धि :-वैश्वीकरण के फलस्वरूप बिहार से किये गये निर्यातों में वृद्धि हुई
है। फलों के निर्यात के अंतर्गत बिहार लीची ,आम तथा मखाना के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है।
3. विदेशी
प्रत्यक्ष विनियोग की प्राप्ति
4. शुद्ध
राज्य घरेलू उत्पाद तथा प्रति व्यक्ति शुद्ध राज्य घरेलू उत्पादन में वृद्धि
5. विश्वस्तरीय
उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता :-बिहार के बाजारों में आज विभिन्न बहुराष्ट्रीय
कंपनियों के मोबाईल फोन ,जूते ,कारें ,अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ आदि उपलब्ध है।
6. रोजगार
के अवसरों में वृद्धि :-उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त लोगों के लिए विदेशों
तथा देश के अन्य भागों में रोजगार के नये अवसर मिले है। जैसे :-बिहार के बहुत सारे
सॉफ्टवेयर इंजिनियर आज विदेशों में नौकरी कर रहे है।
7. बहुराष्ट्रीय
बैंक एवं बीमा कंपनियों का आगमन :-HSBC बैंक आदि का आगमन।
➠बिहार में वैश्वीकरण का नकारात्मक प्रभाव
1. कृषि एवं
कृषि आधारित उद्योगों की उपेक्षा :-यहॉं कृषि आधारित उद्योगों के विकास की संभावना
काफी है,लेकिन इन
उद्योगों में वैश्वीकरण के बाद जितना निवेश होना चाहिए था ,उतना
नहीं हुआ है।
2. कुटीर
एवं लघु उद्योग पर विपरीत प्रभाव :-यहाँ कुटीर एवं लघु उद्योग ज्यादा है।लेकिन, वैश्वीकरण
के कारण कुटीर एवं लघु उद्योगों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। क्योकि उनके
द्वारा निर्मित वस्तुओं को बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निर्मित वस्तुओं का सामना
करना पड़ता है जो अच्छी एवं सस्ती होती है।
3. रोजगार
पर विपरीत प्रभाव :-बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निर्मित वस्तुओं के आने से छोटे
पैमाने के उद्योगों की बहुत सारी इकाईयाँ बंद हो गई है।
4. आधारभूत
संरचना के कम विकास के कारण कम निवेश :-बिहार में आधारभूत संरचना जैसे सड़क ,बिजली ,हवाई
अड्डा की कमी के कारण उतना निवेश नहीं हुआ है ,जितना अन्य राज्यों में हुआ है।
*आर्थिक
सुधारों का अर्थ :-
⇒भारत में
आर्थिक सुधारों का मतलब उन नीतियों से है जिनका प्रारंभ 1991 से
अर्थव्यवस्था में कुशलता ,उत्पादकता ,लाभदायकता एवं प्रतियोगिता की शक्ति के स्तरों में वृद्धि
करने के दृष्टिकोण से किया गया है।
➤ये आर्थिक सुधार उदारीकरण ,निजीकरण तथा वैश्वीकरण की नीतियों पर आधारित है। जिसे हम LPG निति भी
कहते है।
L-Liberalisation(उदारीकरण)
P-Privatisation(निजीकरण)
G-Globalisation(वैश्वीकरण)
➤आर्थिक सुधारों को हम नई आर्थिक निति के नाम से भी जानते
है।
*आर्थिक
सुधारों या नई आर्थिक निति के उदेश्य :-
⇒आर्थिक
सुधारों या नई आर्थिक निति के निम्नलिखित उदेश्य है।
1. उत्पादन
इकाइयों की कार्यकुशलता एवं उत्पादकता स्तर में सुधार लाना।
2. उत्पादन
इकाइयों की प्रतियोगी क्षमता को बढ़ाना।
3. आर्थिक
विकास की दर को बढ़ाना।
4. आर्थिक
विकास के लिए विश्वव्यापी संसाधनों का प्रयोग करना।
5. तकनीक का
अधिक से अधिक उपयोग करना।
*वैश्वीकरण
एवं आम आदमी
⇒आम आदमी
समाज के ऐसे वर्ग समूह को कहते है जो मध्यम अथवा निम्न श्रेणी के लोग होते है जो
सामान्य उपभोग की सुविधाओं से वंचित होते है। जो किसी तरह अपनी जीविका का निर्वाह
करते है।
➤NCAER:-National Council of Applied Economic Research)
➤NCAER ने 2006 के
प्रकाशित द ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास में आय के आधार पर यह बतलाने की कोशिश की है
की भारतीय सामाजिक संरचना में आम आदमी की कितनी भागीदारी है।
➤देश की पूरी जनसंख्या का लगभग 85% लोग
जीवनयापन की सामान्य सुविधाओं से वंचित है।
*आम आदमी
पर वैश्वीकरण का अच्छा प्रभाव :
1. उपयोग के
आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता
2. रोजगार
की बढ़ी हुई संभावना
3. आधुनिकतम
तकनीक की उपलब्धता
*आम आदमी
पर वैश्वीकरण का बुरा प्रभाव :
1. कम कुशल
लोगों में बेरोजगारी बढ़ने की आशंका
2. उद्योग
एवं व्यवसाय के क्षेत्र में बढ़ती हुई प्रतियोगिता
3. श्रम
संगठनों पर बुरा प्रभाव
4. मध्यम
एवं छोटे उत्पादकों की कठिनाई
5. कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र का संकट