Ex :-2 समाजवाद एवं साम्यवाद
⇒समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है,जिसने आधुनिक काल में समाज को एक नया आवाम दिया।
*समाजवाद(Socialism):- समाजवाद
एक आर्थिक-सामाजिक दर्शन है। समाजवादी व्यवस्था में धन-सम्पति का स्वामित्व और
वितरण समाज के नियंत्रण के अधिन रहते है।
*समाजवाद
की उत्पत्ति
⇒समाजवादी
भावना का उदय मूलतः 18वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप हुआ था।जब
श्रमिकों को कोई अधिकार नहीं था और उनका क्रूर शोषण हो रहा था। मजदुर वर्ग पूरी
तरह पूंजीपतियों की दया पर जीवित था।
➠आर्थिक दृष्टि से समाज का विभाजन दो वर्गों में हो गया
था।
i. पूंजीपति
वर्ग
ii. श्रमिक
वर्ग
*पूंजीवाद
:- पूंजीवाद से
तात्पर्य ऐसी अर्थव्यवस्था से है ,जिसमे
उत्पादन के साधन पर व्यक्तिगत स्वामित्व होता है। जिसका उद्देश्य लाभार्जन है।
यह एक ऐसी राजनितिक आर्थिक व्यवस्था है जिसमे निजी सम्पति
तथा निजी लाभ की अवधारणा को मान्यता दी
जाती है। यह सार्वजनिक क्षेत्र में विस्तार एवं आर्थिक गतिविधियों में
सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करती है।
➤जिस समय श्रमिक जगत आर्थिक दुर्दशा और सामाजिक पतन की
स्थिति से गुजर रहा था ,उसी समय श्रमिकों को महत्वपूर्ण राष्ट्रभक्तों ,विचारकों
और लेखकों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
➤इन व्यक्तियों ने सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में एक नवीन
विचारधारा का प्रतिपादन किया ,जिसे समाजवाद के नाम से जाना जाता है।
➤ इन
विचारकों में कार्ल मार्क्स ,राबर्ट ओवन ,सेन्ट
साइमन ,फौरियर ,लुई ब्लां एवं एंगेल्स का नाम विशेष उल्लेखनीय है।
⇒आधुनिक
समाजवाद का विभाजन दो चरणों में किया जाता है:-
i. मार्क्स
से पूर्व का समाजवाद (यूटोपियन समाजवाद)
ii. मार्क्स के बाद का समाजवाद (वैज्ञानिक समाजवाद)
*यूटोपियन
समाजवादी
⇒यूटोपियन
समाजवादियों की दृष्टि आदर्शवादी थी तथा उनके कार्यक्रम की प्रकृति अव्यवहारिक थी।
ज्यादातर यूटोपियन विचारक फ़्रांसीसी थे जो क्रांति के बदले शांतिपूर्ण में विश्वास
रखते थे।
प्रथम यूटोपियन समाजवादी,हिलने
समाजवादी विचारधारा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ,जिसमे एक
फ़्रांसीसी विचारक सेंट साइमन था।
➤सेंट साइमन का मानना था की राज्य एवं समाज ढंग से संगठित करना चाहिए की लोग एक दूसरे का
शोषण करने के बदले मिलजुल कर प्रकृति का दोहन करे।
➤एक अन्य यूटोपियन विचारक चार्ल्स फौरियर था ,वह
आधुनिक औद्योगिकवाद का विरोधी था तथा उसका मानना था की श्रमिकों को छोटे नगर अथवा
कस्बों में काम करना चाहिए। उसने किसानों के लिए एक फ्लांग्स बनाये जाने की योजना
रखी,लेकिन यह योजना असफल हुई।
➤फ्रांसीसी यूटोपियन चिंतकों में एक मात्र व्यक्ति लुई
ब्लां,जिसने राजनीति में भी हिस्सा लिया था। उसके सुधार
कार्यक्रम अधिक व्यावहारिक थे।
➤फ़्रांस से बाहर सबसे महत्वपूर्ण यूटोपियन चिंतक ब्रिटिश
उद्योगपति रोबर्ट ओवन था। उसने स्कॉटलैंड के न्यू लुनार्क नामक स्थान पर एक
फैक्ट्री की स्थापना की थी।
*कार्ल
मार्क्स
⇒कार्ल
मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 ई० को जर्मनी में राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक
यहूदी परिवार में हुआ था। कार्ल मार्क्स
पिता हेनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे। कार्ल मार्क्स,मार्क्स
हीगल के विचारों से प्रभावित था। 1843 में
बचपन की मित्र जेनी से विवाह किया। उसने राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास पर
मॉन्टेस्क्यू तथा रूसो के विचारों का गहन अध्यन किया।
➤कार्ल मार्क्स ने ऐंगेल्स के साथ मिलकर 1848 में एक 'साम्यवादी
घोषणा पत्र'प्रकाशित किया जिसे आधुनिक समाजवाद का जनक कहा जाता है।
➤कार्ल मार्क्स ने 1867 में 'दास-कैपिटल' नामक
पुस्तक की रचना की जिसे "समाजवादियों की बाइबिल" कहा जाता है।
➤कार्ल मार्क्स की मृत्यु 15 मार्च 1883 को हुई
थी।
*कार्ल
मार्क्स के सिद्धांत
1. द्वंदात्मक
भोतिकवाद का सिद्धांत
2. वर्ग-संघर्ष
का सिद्धांत
3. इतिहास
की भूतिकवादी व्याख्या
4. मूल्य
एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत
5. राज्यहीन
व वर्गहीन समाज की स्थापना
*मार्क्स
तथा प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ :-
⇒1864 में प्रथम
अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना हुई। इस संघ की स्थापना का श्रेय मार्क्स को है। इस
सम्मेलन में नारा बुलंद किया गया -'अधिकार
के बिना कर्तव्य नहीं और कर्तव्य के बिना अधिकार नहीं। "
*द्वितीय
अंतरराष्ट्रीय संघ :-
⇒विभिन्न
देशों के समाजवादी दलों को एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के तहत सूत्रबद्ध करने के लिए 14 जुलाई 1889 को
पेरिस में एक सम्मलेन हुआ,जिसमें बीस देशों के करीब 400
प्रतिनिधिओं ने भाग लिया। इसे द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ के नाम से जाना जाता है।
➧इस सम्मलेन में यह निर्णय लिया गया की:-
i. प्रत्येक वर्ष एक मई का दिन मजदूर वर्ग की एकता दिवस के
रूप में मनाया जायेगा।
ii. मजदूरों
के लिए आठ घंटे के कार्य दिवस की मांग किया जाना भी तय किया गया।
➤इसका अंतरराष्ट्रीय सचिवालय ब्रूसेल्स में स्थापित किया
गया।
➤1 मई 1890 को
यूरोप और अमेरिका में लाखों मजदूरों ने हड़ताल और प्रदर्शन किया,तब से 1 मई को
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में सारे देश में मनाया जाता है।
*1917 की
बोल्शेविक क्रांति :-
⇒रूस में 1917 में हुई
क्रांति को ही बोल्शेविक क्रांति कहा जाता है,क्योंकि
बोल्शेविक नामक राजनीतिक समूह ने इस क्रांति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और
क्रांति की दिशा एवं दशा निर्धारित की थी।
*सर्वहारा
वर्ग :- समाज का
वैसा वर्ग जिसमें किसान, कृषक मजदुर ,सामान्य
मजदुर और आम गरीब लोग शामिल हो ,उसे सर्वहारा वर्ग के नाम से जाना जाता है।
➨1917 की
बोल्शेविक क्रांति के निम्नलिखित कारण थे :-
1. जार की
निरंकुशता एवं अयोग्य शासन
:-1917 से
पूर्व रूस में रोमनोव राजवंश का शासन था। इस समय रूस के सम्राट को 'जार' कहा जाता
था। जार निकोलस II ,जिसके शासनकाल में क्रांति हुई ,जो राजा
के दैवी अधिकारों में विशवास रखता था। उसे आम लोगों की सुख-दुःख की कोई चिंता नहीं
थी। जार ने जो अफसरशाही बनायीं थी वह अस्थिर और अकुशल थी।
2. कृषकों
की दयनीय स्थिति
:-रूस में
बहुसंख्यक भाग कृषक ही थे ,उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी।उनके पास पूंजी का आभाव था
तथा करों के बोझ से वे दबे हुए थे। ऐसे में किसानो के पास क्रांति के सिवा कोई
उपाय नहीं था।
➤1861 में जार
अलेक्जेंडर द्वितीय के द्वारा कृषि दासता समाप्त कर दी गई थी लेकिन इससे किसानों
की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था।
3. मजदूरों
की दयनीय स्थिति
:-रूस में
मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी,उन्हें
अधिक काम करना पड़ता था लेकिन उनकी मजदूरी काफी कम थी। मजदूरों को कोई राजनैतिक
अधिकार नहीं थे। अपनी मांगों के समर्थन में वे हड़ताल भी नहीं कर सकते थे। अतः वे
अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं थे।
4. औद्योगीकरण
की समस्या
5. रूसीकरण
की नीति
6. विदेशी
घटनाओं का प्रभाव
7. रूस में
मार्क्सवाद का प्रभाव तथा बुद्धिजीवियों का योगदान
8. तात्कालिक कारण प्रथम विश्व युद्ध में रूस का पराजय
*खुनी
रविवार :- 1905 ई० के रूस-जापान युद्ध में एशिया के एक छोटे देश जापान से
पराजय के कारण रूस में क्रांति हो गई। 9 जनवरी 1905 को लोगों
का समूह 'रोटी दो' के नारे के साथ सड़को पर प्रदर्शन करते हुए सेंट
पीटर्सवर्ग स्थित महल की और जा रहा था। लेकिन जार की सेना ने इस निहत्थे लोहों पर
गोलियॉं बरसायीं ,जिसमे हजारों लोग मारे गए। उस दिन रविवार था ,इसीलिए
इस तिथि को खुनी रविवार के नाम से जाना जाता है।
➤लियो टॉलस्टाय ने वार एंड पीस की रचना की है।
➤1898 ई० में
रशियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना हुई।
➤1901 ई० में
सोशलिस्ट रिवोल्यूशनरी पार्टी का गठन हुआ जो किसानों की मांगों को उठाती थी।
*अक्टूबर क्रांति :- 7 नवंबर 1917 ई० को बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड के रेलवे स्टेशन ,बैंक ,डाकघर ,कचहरी तथा अन्य सरकारी भवनों पर अधिकार कर लिया और करेंस्की सरकार का तख्ता पलट दिया और रूस पर अधिकार जमा लिया। यह नवम्बर में हुई थी किन्तु रुसी कलेण्डर के अनुसार यह अक्टूबर था ,जिस कारण इसे अक्टूबर क्रांति कहते है।
*अप्रैल
थीसिस :- अप्रैल,1917 ई0 में
लेनिन ने रूस में क्रांतिकारी योजना प्रकाशित की जो 'अप्रैल
थीसिस' के नाम से जानी जाती है।
➤ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि रूस और जर्मनी के बिच हुआ था।
➤ट्रॉटस्की के नेतृत्व में एक विशाल लाल सेना गठित की गई।
*चेका :- आंतरिक विद्रोह को दबाने के लिए 'चेका' नामक
गुप्त पुलिस संगठन बनाया गया ,जो अचानक छापा मार कर विद्रोहियों को गिरफ्तार कर लेती
थी।
➤1918 में
विश्व का पहला समाजवादी शासन स्थापित करने वाला देश रूस का नया संविधान बनाया गया।
➤लेनिन ने शासन के नियमों में परिवर्तन करने के साथ ही
बोल्शेविक दल का नाम बदलकर साम्यवादी दल कर दिया और लाल रंग के झंडे पर हँसुए और
हतौड़े को सुशोभित कर देश का राष्ट्रीय झंडा तैयार किया ,और उसके
बाद यह झंडा साम्यवाद का प्रतीक बन गया।
*लेनिन :- लेनिन एक स्वानदर्शी विचारक नहीं,बल्कि एक
कुशल सामाजिक चिंतक तथा व्यावहारिक राजनीतिज्ञ था। उसने 1921 में एक
नई नीति घोषणा की। 1924 ई० में
लेनिन की मृत्यु हो गई।
*नई
आर्थिक नीति :- 1921 में हुए
विद्रोह के बाद लेनिन ने साम्यवादी व्यवस्था में परिवर्तन करने और पूंजीवादी
व्यवस्था की ओर लौटने के उद्देश्य से “नई
आर्थिक नीति” की घोषणा की और नई आर्थिक नीति का उद्देश्य श्रमिक वर्ग
और कृषकों की आर्थिक स्थिति को मज़बूत बनाना, पूरे देश
की कामगार आबादी को देश की अर्थव्यवस्था के विकास में सहयोग करने के लिये
प्रोत्साहित करना था।
➨नई आर्थिक नीति में निम्नलिखित प्रमुख बातें थी :-
i. ट्रेड
यूनियन की अनिवार्य सदस्यता समाप्त कर दी गई।
ii. विभिन्न
स्तरों पर बैंक खोले गए।
iii. विदेशी
पूंजी भी सिमित तौर पर आमंत्रित की गई।
iv. किसानों
से अनाज ले लेने के स्थान पर एक निश्चित कर लगाया गया।
v. उद्योगों
का विकेन्द्रीकरण कर दिया गया।
➤स्टालिन कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव था और 1953 ई० में
अपनी मृत्यु तक तानाशाही व्यवहार करता रहा।
➤1975 ई० में
सयुंक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 8 मार्च को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया गया।
➤सोवियत संघ का विघटन दिसम्बर 1991 ई० में हुआ।