Ex:-1 बिहार के एक गॉंव की कहानी
गॉंव फतेहपुर
⇒फतेहपुर गॉंव में श्री फतेहश्वर नारायण सिंह एक
प्रसिद्ध स्वंतत्रता सेनानी ,कर्मठ एवं आदर्श व्यक्ति थे | उन्हीं
के नाम पर
इस गॉंव का नाम "फतेहपुर " पड़ा |
⇒इस कहानी का उदेश्य उत्पादन से
सम्बंधित कुछ मूल विचारों से छात्रों परिचय कराना है | इस कहानी से यह स्पष्ट है की फतेहपुर गॉंव अन्य गॉंव ,कस्बों
की तुलना में काफी आधुनिक एवं उन्नत है | यहाँ सड़क ,परिवहन के साधनों ,बिजली ,सिंचाई ,विद्यालयों ,कॉलेज ,और स्वास्थ्य केंद्रों का पयार्प्त विकसित तंत्र है |
*अर्थव्यवस्था
:- अर्थव्यवस्था एक ढाँचा है ,जिसके अंतर्गत लोगो की आर्थिक क्रियाओं का अध्यन किया
जाता है |
*उत्पादन
:- घटको या कच्चे माल से निर्माण या निर्माण की क्रिया या निर्माण की प्रक्रिया को
उत्पादन कहते है |
या,मनुष्य अपने आर्थिक प्रयास से प्रकृति द्वारा उपलब्ध किये
गये पदार्थो के रूप
स्थान या अधिकार में परिवर्तन लाकर उन्हें अधिक उपयोगी बनाता है ,उत्पादन
कहलाता है |
अर्थशास्त्र में उत्पादन का अर्थ उपयोगिता का सृजन करना है |
*उत्पादन का साधन(Factors of Production):-वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के लिए कुछ साधनो की आवश्यकता पड़ती है ,जिसे हम उत्पादन का साधन कहते है |
जैसे :- खेती :- भूमि ,हल ,बीज
,मजदुर ,पूंजी
इत्यादि
कारखाना :- भूमि ,मकान ,मशीन
,मजदुर ,पूंजी
इत्यादि
➨उत्पादन
के निम्नलिखित पांच साधन है :-
(i)भूमि(Land):- उत्पादन के लिए सर्वप्रथम भूमि की आवश्यकता पड़ती है |
➤भूमि
उत्पादन का एक निष्क्रिय साधन है लेकिन फिर भी इसे उत्पादन का मौलिक साधन माना
जाता है |
➤भूमि मापने की मानक इकाई हेक्टेयर है | गॉंव में भूमि का माप एकड़ ,बीघा ,कट्ठा ,धुर आदि जैसे क्षेत्रीय इकाइयों में भी
किया जाता है |
*बहुविध फसल प्रणाली से क्या तात्पर्य है
?
⇨एक
वर्ष में किसी भूमि पर एक से अधिक फसल पैदा करने के तरीके को बहुविध फसल प्रणाली
कहते है |
*H.Y.V का क्या तात्पर्य है ?
⇨इसका अर्थ है की अधिक उपज वाले बीज |
(ii)श्रम(Labour):- श्रम(मजदुर)उत्पादन का दूसरा महत्वपूर्ण साधन है | मजदुर (श्रम) के बिना किसी प्रकार का
उत्पादन संभव नहीं है |
➤श्रम
को उत्पादन का सक्रिय साधन(Active
Factor) कहा जाता है |
*छोटे किसान :- छोटे किसान वे होते है जो
अपने परिवारों के साथ अपने खेतो में स्वय काम करते है|
*मझोले /बड़े किसान :- बड़े किसान ऐसे
किसानो को कहते है जो अपने खेतों में काम करने के लिए दूसरे श्रमिकों को किराये पर
लगाते है |
➤जिन कृषक के पास 2 हेक्टेयर से कम कृषि क्षेत्र होते है वो
छोटे कृषक कहलाते है ,और
जिन कृषक के पास 2 हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र होते है
वो मझोले /बड़े कृषक कहलाते है |
➤श्रमिक
दो प्रकार के होते है |
(1)शारीरिक श्रम(Physical Labour)
(2)मानसिक श्रम(Mental Labour)
*मजदूरी(Wages) :- राष्ट्रीय आय का वह हिस्सा जो श्रमिकों को उनके काम (परिश्रम)
के लिए दिया जाता है ,मजदूरी कहलाता है |
(iii)पूँजी(Capital):- धन का वह अंश जिसका प्रयोग पुनः उत्पादन के लिए किया जाता है ,उसे पूँजी कहते है |
➤पूँजी उत्पादन का एक प्रमुख साधन है जिसके
अंतर्गत मुद्रा अथवा वस्तुओं का भंडार होता
है ,जिसका प्रयोग उत्पादन के लिए किया जाता
है |
(iv)संगठन(Organisation):- एक संगठन या संगठन एक इकाई है जिसमें कई लोग शामिल होते है
संगठन कहलाता है |
जैसे :-एक संस्था या एक एसोसिएसन ,जिसका एक उदेश्य होता है |
➤संगठन
उत्पादन का एक सक्रिय साधन माना गया है |
➤उत्पादन के विभिन्न साधनो को एकत्रित कर उन्हें उत्पादन
में लगाने की क्रिया को
संगठन कहते है और जो व्यक्ति यह कार्य
करता है ,उसे व्यवस्थापक अथवा संगठनकर्ता कहते है |
(v)साहस या उधमी(Enterprises):- उत्पादन में जोखिम उठाने के कार्य को साहस कहते है | तथा जो व्यक्ति इस जोखिम को उठाता है
उसे साहसी या उधमी कहते है |
➤उत्पादन
तथा उपयोगिता सृजन के तरीके :-
(1)रूप उपयोगिता
(2) स्थान उपयोगिता
(3) समय उपयोगिता
(4)स्वामित्व उपयोगिता
(5)सेवा उपयोगिता
(6)ज्ञान उपयोगिता
*वस्तुओं
एवं सेवाओं का वर्गीकरण :-
⇒वस्तुओं को हम दो वर्गों विभाजित कर सकते है |
(i)उपभोग की
वस्तुएँ (Consumer Goods)
(ii)उत्पादक
वस्तुएँ (Producer Goods)
(i)उपभोग की
वस्तुएँ :-उपभोग की वस्तुएँ वे है जिनका प्रत्यक्ष रूप से मानवीय आवश्यकताओं के
लिए उपयोग होता है |
जैसे :- भोजन ,वस्त्र ,मकान ,पुस्तक ,कलम ,रेडियो आदि
➧उपभोग की
वस्तुएँ भी दो प्रकार की होती है |
(1)गैर-टिकाऊ
वस्तुएँ :-खाद्य एवं पेय पदार्थ इत्यादि उपभोग की गैर-टिकाऊ वस्तुएँ है |
या ,जिनका हमारी आवश्यकताओं के लिए केवल एक ही बार प्रयोग
किया जा सकता है |
(2)टिकाऊ
वस्तुएँ :-वैसा वस्तु जिनका उपभोग लंबे समय तक होता है |
जैसे :- मकान ,टेलीविजन ,घड़ी आदि
(ii)उत्पादक वस्तुएँ:- उत्पादक
वस्तुएँ उन वस्तुओं को कहते है ,जिनका अधिक उत्पादन अथवा आय
प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है |
➧उत्पादक
वस्तुएँ भी दो प्रकार की होती है |
(1)गैर-टिकाऊ
वस्तुएँ :-जैसे -खाद ,बीज ,कच्चामाल
इत्यादि
(2)टिकाऊ
वस्तुएँ :-जैसे -मशीन ,यंत्र ,उपकरण
इत्यादि